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Friday, November 30, 2018

साहसी होना है

साहसी होना है, शिष्ट होना है, पर अपने आपको कोसना नहीं है।

परम पूज्य सुधांशुजी महाराज 

Wednesday, October 31, 2018

😴 😴 👉 Night Story 👈 😴 😴

         🙏 *यह भी नहीं रहने वाला*   🙏

         एक साधु देश में यात्रा के लिए पैदल निकला हुआ था। एक बार रात हो जाने पर वह एक गाँव में आनंद नाम के व्यक्ति के दरवाजे पर रुका।

*आनंद ने साधू  की खूब सेवा की। दूसरे दिन आनंद ने बहुत सारे उपहार देकर साधू को विदा किया।*

साधू ने आनंद के लिए प्रार्थना की  - "भगवान करे तू दिनों दिन बढ़ता ही रहे।"

       *साधू की बात सुनकर आनंद हँस पड़ा और बोला - "अरे, महात्मा जी! जो है यह भी नहीं रहने वाला ।" साधू आनंद  की ओर देखता रह गया और वहाँ से चला गया ।*

      दो वर्ष बाद साधू फिर आनंद के घर गया और देखा कि सारा वैभव समाप्त हो गया है । पता चला कि आनंद अब बगल के गाँव में एक जमींदार के यहाँ नौकरी करता है । साधू आनंद से मिलने गया।

*आनंद ने अभाव में भी साधू का स्वागत किया । झोंपड़ी में फटी चटाई पर बिठाया । खाने के लिए सूखी रोटी दी । दूसरे दिन जाते समय साधू की आँखों में आँसू थे । साधू कहने लगा - "हे भगवान् ! ये तूने क्या किया ?"*

     आनंद पुन: हँस पड़ा और बोला - "महाराज  आप क्यों दु:खी हो रहे है ? महापुरुषों ने कहा है कि भगवान्  इन्सान को जिस हाल में रखे, इन्सान को उसका धन्यवाद करके खुश रहना चाहिए। समय सदा बदलता रहता है और सुनो ! यह भी नहीं रहने वाला।"

      *साधू मन ही मन सोचने लगा - "मैं तो केवल भेष से साधू  हूँ । सच्चा साधू तो तू ही है, आनंद।"*

      कुछ वर्ष बाद साधू फिर यात्रा पर निकला और आनंद से मिला तो देखकर हैरान रह गया कि आनंद  तो अब जमींदारों का जमींदार बन गया है ।  मालूम हुआ कि जिस जमींदार के यहाँ आनंद  नौकरी करता था वह सन्तान विहीन था, मरते समय अपनी सारी जायदाद आनंद को दे गया। 

*साधू ने आनंद  से कहा - "अच्छा हुआ, वो जमाना गुजर गया ।   भगवान्  करे अब तू ऐसा ही बना रहे।"*

    *यह सुनकर आनंद  फिर हँस पड़ा और कहने लगा - "महाराज  ! अभी भी आपकी नादानी बनी हुई है।"*

  साधू ने पूछा - "क्या यह भी नहीं रहने वाला ?"

    *आनंद उत्तर दिया - "हाँ! या तो यह चला जाएगा या फिर इसको अपना मानने वाला ही चला जाएगा । कुछ भी रहने वाला नहीं  है और अगर शाश्वत कुछ है तो वह है परमात्मा और उस परमात्मा की अंश आत्मा।"*

आनंद  की बात को साधू ने गौर से सुना और चला गया।

     *साधू कई साल बाद फिर लौटता है तो देखता है कि आनंद  का महल तो है किन्तू कबूतर उसमें गुटरगूं कर रहे हैं, और आनंद  का देहांत हो गया है। बेटियाँ अपने-अपने घर चली गयीं, बूढ़ी पत्नी कोने में पड़ी है ।*

*कह रहा है आसमां यह समा कुछ भी नहीं।*

रो रही हैं शबनमें, नौरंगे जहाँ कुछ भी नहीं।
जिनके महलों में हजारों रंग के जलते थे फानूस।
झाड़ उनके कब्र पर, बाकी निशां कुछ भी नहीं।

*साधू कहता है - "अरे इन्सान! तू किस बात का अभिमान करता है ? क्यों इतराता है ? यहाँ कुछ भी टिकने वाला नहीं है, दु:ख या सुख कुछ भी सदा नहीं रहता। तू सोचता है पड़ोसी मुसीबत में है और मैं मौज में हूँ । लेकिन सुन, न मौज रहेगी और न ही मुसीबत। सदा तो उसको जानने वाला ही रहेगा। सच्चे इन्सान वे हैं, जो हर हाल में खुश रहते हैं। मिल गया माल तो उस माल में खुश रहते हैं, और हो गये बेहाल तो उस हाल में खुश रहते हैं।"*

 साधू कहने लगा - "धन्य है आनंद! तेरा सत्संग, और धन्य हैं तुम्हारे सतगुरु! मैं तो झूठा साधू हूँ, असली फकीरी तो तेरी जिन्दगी है। अब मैं तेरी तस्वीर देखना चाहता हूँ, कुछ फूल चढ़ाकर दुआ तो मांग लूं।"

  *साधू दूसरे कमरे में जाता है तो देखता है कि आनंद  ने अपनी तस्वीर  पर लिखवा रखा है - "आखिर में यह भी  नहीं रहेगा* ।"

     ❓ 👉 🤔 *विचार करे* 🤔 👈 ❓

😴😴😴😴😴😴😴😴😴😴😴

Tuesday, October 30, 2018

अपने आपको



अपने आपको संभालना सब से बडी कला हे !
पूज्य सुधांशुजी महाराज   

Sunday, October 28, 2018

मोती ग्यान के

मोती ग्यान के
जीतने के लिये प्रेम जीतो !
पीने के लिये क्रोध पीयो !
खाने के लिये गम खाओ !
देने के लिये दान दो !
लेने के लिये ग्यान लो !
कहने के लिये सत्य कहो !
रखने के लिये इज्जत रखो !
फेंकने के लिये ईर्ष्या फेंको !
छोडने के लिये मोह छोडो !
दिखाने के लिये दया दिखाओ !
श्रद्धा स्मारिका २००८ थाने मण्डल  

शरीर की यात्रा

शरीर की यात्रा तभी ठीक रहती हैजब कर्म से जुड़े रहते है। 


परम पूज्य सुधांशुजी महाराज 

Friday, October 26, 2018

Tulsi mahima

🌼#तुलसी_महिमा🌼
        🌿🌷🕉🌷🌿
कार्तिक स्नान के साथ तुलसी जी की पूजा का भी अत्यधिक महत्व है. इसी माह में तुलसी जी का विवाह भी कराया जाता है. जिन्हें कन्या संतान नहीं होती वह तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी से कराकर कन्या दान का सुख पाते हैं. इसी कार्तिक माह से जुड़ी एक कहानी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.*
*कार्तिक माह में सभी औरतें तुलसी जी को जल से सींचा करती थी. एक बुढ़िया भी थी जो कार्तिक माह में तुलसी को सींचने जाती थी और जब वह जाती तो तुलसी माता से कहती कि हे तुलसी माता ! सत्त की दाता, मैं तेरा बिरवा सींचती हूँ, मुझे बहू दे, पीले रंग की धोती दे, मीठा ग्रास दे, बैकुण्ठ में वास दे, अच्छी मौत दे, चंदन का काठ दे, अच्छा राज दे, खाने को दाल-भात दे और ग्यारस (एकादशी) के दिन कृष्ण का कांधा दे. बुढ़िया माँ की यह बातें सुन तुलसी माता सूखने लगी.*

*तुलसी माता को यूँ सूखते देख* 

*भगवान ने पूछा हे तुलसे* *तुम दिन-प्रतिदिन क्यों सूखती जा रही हो?*

*तुलसी माता ने कहा कि बस मेरे मन की मत पूछो!* *भगवान ने कहा कि मैं नहीं पूछूंगा तो कौन पूछेगा? इस पर तुलसी माता कहती हैं कि एक बुढ़िया आती है और अपनी बात कहकर चली जाती है. मैं उसकी सभी बातें पूरी कर दूँगी लेकिन कृष्ण का कांधा कहां से लाऊंगी?* *भगवान कृष्ण बोले कि वह मरेगी तो अपने आप ही कांधा देने आऊँगा तुम बुढ़िया माई से यह बात कह देना. इसके बाद बुढ़िया मर गई.*
*बुढ़िया के मरने पर सारा गाँव इकठ्ठा हो गया और उसका अंतिम संस्कार आने पर उसे उठाने लगे लेकिन वह बहुत भारी हो गई** 

*जिससे उसकी अर्थी टस से मस नहीं हुई. सभी बोले कि यह तो बहुत संस्कारी थी,* 

*बहुत पूजा-पाठ करती थी, कोई पाप नहीं किया फिर यह इतनी भारी कैसे हो गई?* *बूढ़े ब्राह्मण के वेश में भगवान आए और कहने लगे कि यह भीड़ कैसी है? तब गाँव बाले बोले कि एक बुढ़िया मर गई है और वह इतनी पापिन थी कि उसकी अर्थी नहीं उठ रही है, बहुत भारी हो गई है.भगवान बोले कि मुझे इसके कान में कुछ कहने दो फिर यह उठ जाएगी.*

*भगवान बुढ़िया के पास गए और उसके कान में कहा कि माई तू अपने मन की कर ले पीताम्बर की धोती ले, मीठा ग्रास ले, वैकुण्ठ में वास ले, चटक की चाल ले, चंदन का काठ ले, झालर की झंकार ले, दाल -भात को जी और कृष्ण का कंधा ले. भगवान की सभी बातें सुनकर बुढ़िया हल्की हो गई.*

 *भगवान अपने कंधे पर उसे ले गए. बुढ़िया को मुक्ति मिल गई और वह वैकुण्ठ को चली गई.*
*हे तुलसी माता ! जैसे आपने उस बुढ़िया माई की मुक्ति की वैसे सभी की करना. जैसे भगवान ने उसे काँधा दिया हमें भी देना.*
🌸🌼🌸🌼🌸🌼जय जय श्री कृष्णा... जय हो तुलसी महारानी की 
      🌿🌷🕉🌷🌿