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Sunday, May 17, 2015

यह जीवन तभी तक आनंदित




"नदी के दो किनारे उसकी दो सीमा रेखायें हैं, जब नदी उसके बीच में होकर बहती है तब उसका सौन्दर्य है और किनारे तोड़कर नदी बाहर आ जाये तो विनाश की स्थिती उत्पन्न कर देगी। यह जीवन तभी तक आनंदित हो सकता है, उन्नति का कारण बन सकता है, यश का कारण बन सकता है, जहाँ मर्यादाओं के बीच में जीवन बहता हो। किनारा तोड़कर बाहर आओगे, सम्मान के हकदार नहीं रह पाओगे।

मर्यादा समाज में भी महत्वपूर्ण चीज़ है, जीवन में भी महत्वपूर्ण चीज़ है।

Saturday, May 16, 2015

जीवन में चमत्कार



जीवन में जब तक विवेक का ब्रेक नहीं होगा, तब तक इस दुनिया की घाटी में जीना बड़ा मुश्किल काम है। विवेक और साधना दोनों मिल जाएँ तो जीवन में चमत्कार होता है। विवेक तो रक्षा करता है और साधना आपके अंदर स्थिरता लाती है। 

Friday, May 15, 2015

क्रोध को जीवन

http://ammritvanni.blogspot.in/



परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

क्रोध को जीवन मे स्थान न दे ।जैसे सूखे पेड़ को पक्षी छोड़ कर चले जाते है इसी तरह क्रोधी व्यक्ति को भी लोग छोड़ कर दूर हो जाते है । बात - बात मे भड़क जाने वाले व्यक्ति से हर कोई बात करने से कतराता है

Thursday, May 14, 2015

जो आँखे अपने

http://ammritvanni.blogspot.in/



परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

जो आँखे अपने प्यारे प्रभु को निहारती है- वह आँखे धन्य है , जो कान निरंतर प्रभु महिमा सुनते है वह कान धन्य है , जो जीभ दिन - रात प्रभु का गुणगान करती है वह जीभ धन्य है । प्रतिदिन सत्संग अपनाओ और जीवन ऊपर उठाओ ।

Wednesday, May 13, 2015

जो व्यथाऍं प्रेरणा दें




जो व्यथाऍं प्रेरणा दें, उन व्य्थाओं को दुलारो,

जूज्ञ कर कठनईयों से रंग जीवन का निखारो,
बृक्ष कट -कट कर बढा हे,
दीप बुज्ञ -बुज्ञ कर जला हे,
मृत्यु से जीवन मिले तो उसकी आरती उतारो!

हममें परमात्मा है



समुद्र में घड़ा पानी का भरिये, स्थिति ऐसी होगी की पानी बहार भी है और अन्दर भी, बीच में घड़ा दिखाई दे रहा है तो वैसे ही हममें परमात्मा है और परमात्मा में हम है।